Naresh Meena News: अंता सीट से निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा ने बूंदी के नैनवां में आदिवासी समाज के सम्मलेन में कहा, ''मैं तो मेरी दुकान कैसे चला रहा हूं, मुझे पता है. जैसे-तैसे जुगाड़ करके मैं अपना काम चला रहा हूं. कभी पायलट साहब की तारीफ करनी पड़ती है, तो कभी गुंजल साहब की तारीफ़ करनी पड़ती है, ताकि गुर्जर समाज थोड़ी-सी म्हारी मदद कर दे, धाकड़ समाज मदद कर दे, माली समाज मदद कर दे और सातू जात मदद करेगी, तभी तो पार पड़ेगी.''
दरअसल आदिवासी समाज में कार्यक्रम में कई आदिवासी नेता और प्रबुद्ध लोग इखट्टा हुए थे. उनमें दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर गंगा सहाय मीणा भी मौजूद थे. नरेश मीणा से पहले सभा को संबोधित करते हुए गंगा सहाय मीणा ने कहा था कि देश के आदिवासी और दलितों को एक नई सांस्कृतिक जकड़न में जकड़ने की कोशिश हो रही है.
गंगा सहाय मीणा ने क्या था ?
उन्होंने कहा, ''उन्हें धार्मिक अंधविश्वासों में फंसाया जा रहा है, कहने को सनातन, सनातन, सनातन. लेकिन सनातन में कहा है कहाँ, यह ज़रा अपना इतिहास उठाकर देखिए. अगर हम मत्स्य भगवान के रास्ते चलेंगे, तो शूद्र वर्ण के अंतर्गत ही आ पाएँगे और हमारा पेशा यही रह जाएगा कि दूसरों की चाकरी करें. उससे आगे कुछ भी कर पाना संभव नहीं होगा.''
गंगा सहाय मीणा ने नरेश मीणा का नाम लेते हुए कहा, ''आपसे एक निवेदन है कि आप भगत सिंह का नाम लेते हैं, लेकिन अपने विचारों में और स्पष्टता की ज़रूरत है, भगत सिंह नास्तिक थे. उन्होंने किताब लिखी थी 'मैं नास्तिक क्यों हूं?' मंदिरों में आपकी ताक़त नहीं है, इन लोगों में आपकी ताक़त है.''
''इतने मंदिर ढोक लिया, जितना कोई आदमी ढोकता तो वोट आ जाते''
इस पर नरेश मीणा ने कहा कि चुनाव में जब किसी गांव में जाते हैं तो लोग मंदिर में ढोकने की बात करते हैं. और में मंदिर जाता हूं. अगर में ऐसे मंच पर बुराई करने लग जाऊं तो मेरी दुकान बंद हो जाएगी. मैंने इतने मंदिर ढोक लिया, जितना कोई आदमी ढोकता तो वोट आ जाते. और जिस मोहल्ले में नहीं जाता, तो फिर चुनाव में भौमिया जी महाराज सभी देवता आ जाते हैं.
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