Health News: भारत में डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में खानपान को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं. सबसे ज्यादा उलझन आलू और शकरकंद को लेकर होती है. सच यह है कि डायबिटीज में किसी भी चीज को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं होता बल्कि सही मात्रा और सही तरीके से खाना अहम होता है.
ग्लाइसेमिक इंडेक्स क्यों है जरूरी
ब्लड शुगर इस बात पर निर्भर करता है कि कोई खाद्य पदार्थ कितनी तेजी से पचकर ग्लूकोज में बदलता है. इसे ग्लाइसेमिक इंडेक्स यानी जीआई कहा जाता है. जिस चीज का जीआई ज्यादा होता है वह शुगर को जल्दी बढ़ाती है. इसलिए आलू और शकरकंद की तुलना जरूरी हो जाती है.
आलू पूरी तरह दुश्मन नहीं
आलू को अक्सर डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण मान लिया जाता है लेकिन हर आलू एक जैसा नहीं होता. भारत में अलग-अलग किस्मों के आलू पाए जाते हैं जिनका असर अलग हो सकता है. कुछ किस्मों में मौजूद स्टार्च धीरे-धीरे टूटता है जिससे शुगर तेजी से नहीं बढ़ती.
उबला हुआ आलू सीमित मात्रा में खाया जाए तो ज्यादा नुकसान नहीं करता. अगर उबालने के बाद उसे ठंडा कर लिया जाए तो उसमें रेजिस्टेंट स्टार्च बनता है जो शुगर को धीरे बढ़ाता है. समस्या तब होती है जब आलू को तला जाए या ज्यादा मसाले और तेल के साथ खाया जाए.
शकरकंद क्यों माना जाता है बेहतर
शकरकंद स्वाद में मीठा होता है लेकिन इसका असर अलग तरह से पड़ता है. इसमें फाइबर अधिक होता है जो शुगर को धीरे-धीरे खून में जाने देता है. इसका जीआई आमतौर पर आलू से कम माना जाता है.
इसके अलावा शकरकंद में विटामिन ए विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो शरीर की कोशिकाओं की रक्षा करते हैं और इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं.
संतुलन ही है असली उपाय
विशेषज्ञों और Indian Council of Medical Research के अनुसार डायबिटीज में संतुलित आहार सबसे जरूरी है. अगर प्राथमिकता ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना है तो शकरकंद थोड़ा बेहतर विकल्प हो सकता है. फिर भी मात्रा पर नियंत्रण जरूरी है.
आलू को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है. दाल और हरी सब्जियों के साथ संतुलित मात्रा में लिया गया उबला आलू भी सुरक्षित हो सकता है. सही जानकारी और संयम ही डायबिटीज प्रबंधन की कुंजी है.
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