Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने सचिवालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी दी. कोर्ट ने निर्देश दिए कि भर्ती प्रक्रिया में 18 पदों को खाली रखा जाए. इससे उन ठेका कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है जो सालों से न्याय की गुहार लगा रहे थे. यह फैसला उन याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आया जिन्होंने लंबे समय से अपनी मांगों को उठाया था.
जानें क्या है पूरा मामला
यह विवाद 2003 से चला आ रहा है. याचिकाकर्ता राकेश सैनी समेत 18 अन्य लोग कार्मिक विभाग के माध्यम से ठेके पर काम कर रहे थे. वे दशकों से अपनी सेवाओं को नियमित करने की मांग कर रहे थे. साल 2016 में जब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती निकली तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. वहां से आदेश आया कि उन्हें भर्ती में प्राथमिकता दी जाए और बोनस अंक दिए जाएं.
लेकिन राज्य सरकार ने इस निर्देश का पालन नहीं किया. नतीजा यह हुआ कि वे भर्ती से वंचित रह गए. अब 2024 में नई भर्ती आई है लेकिन इसमें भी उनके लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं रखा गया. इससे नाराज होकर उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की.
अधिवक्ताओं की दमदार पैरवी
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन नंदवाना और यशवर्धन नंदवाना ने मजबूत दलीलें पेश कीं. उन्होंने बताया कि ठेका कर्मचारी सालों से मेहनत कर रहे हैं लेकिन उन्हें उनका हक नहीं मिल रहा. कोर्ट ने उनकी बातों को गंभीरता से लिया. अधिवक्ता हर्षवर्धन नंदवाना ने कहा कि यह फैसला न्याय की जीत है. अब सरकार को अपनी गलतियों का जवाब देना होगा.
21 जनवरी तक जबाब देने के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 21 जनवरी तक अपना जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है. प्रकरण की अंतिम सुनवाई 2 फरवरी को दोपहर 2 बजे होगी. तब तक 18 पदों पर कोई नियुक्ति नहीं की जा सकती. साथ ही चेतावनी दी कि अगर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का सम्मान नहीं किया तो आगे और सख्त कार्रवाई हो सकती है.
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