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राजस्थान के इस गांव में अब भी नहीं बन सकी सड़क, बीमारों को लेना पड़ता है चारपाई का सहारा

आपातकालीन स्थितियों में एंबुलेंस, दमकल, पुलिस की गाड़ी भी गांव में नहीं पहुंचती. यहां निवास करने वाले ग्रामीण सभी चुनावों में इसे अपना प्रमुख मुद्दा बनाते हैं. लेकिन इसका अभी तक कोई फायदा नहीं हो सका.

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राजस्थान के इस गांव में अब भी नहीं बन सकी सड़क, बीमारों को लेना पड़ता है चारपाई का सहारा
गांव के कच्चे रोड़ की तस्वीर

Rajasthan Village Road Issue: कितनी सरकारें आईं और गई लेकिन आजादी के 7 दशक बाद भी देश में कुछ गांव के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. राजस्थान के डीग जिले की ग्राम पंचायत अऊ स्थित गांव भील का नगला ऐसा ही गांव है, 100 साल पहले बसे इस गांव में आज तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया जा सका है. कच्चा रास्ता भी है लेकिन खेत मालिकों द्वारा फसल के समय उसे बंद कर दिया जाता है. बारिश के समय रास्ता न होने के कारण गांव में चारपहिया वाहन नहीं आ पाता. अगर गांव में कोई बीमार होता है तो उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए चारपाई का सहारा लेना पड़ता है, क्योंकि एंबुलेंस गांव में पहुंचती ही नहीं है. लोगों ने कई बार शासन और प्रशासन के लोगो को अवगत कराया है लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई. 

स्थानीय लोग मतदान का करेंगे बहिष्कार

रास्ते की समस्या देख इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पर कितना विकास हुआ है. आपातकालीन स्थितियों में एंबुलेंस, दमकल, पुलिस की गाड़ी भी गांव में नहीं पहुंचती. यहां निवास करने वाले ग्रामीण इस बार लोकसभा चुनाव में इसे अपना प्रमुख मुद्दा बनाने की ठाने हैं. मंत्री से लेकर के स्थानीय प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बाद भी सड़क का निर्माण नहीं हो सका. गांव के लिए कोई मुख्य रास्ता नहीं है और है भी तो कच्चा रास्ता जो बारिश के समय अवरूद्ध हो जाता है. यहां के लोगों ने कहा कि अगर सरकार और स्थानीय प्रशासन ने इस समस्या का हल नहीं किया तो आने वाले लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करेंगे.

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'बच्चे स्कूल तक नहीं जा पाते'

गीता नाम के ग्रामीण ने बताया कि बारिश के समय बच्चे स्कूल नहीं जा पाते. हम लोगों को भी रोजमर्रा के सामान के लिए कच्चे रास्ते से निकलने को मजबूर हैं, क्योंकि अन्य कोई रास्ता हमारे गांव के लिए नहीं है. चुनाव के समय सभी लोग यहां आते हैं और सड़क निर्माण के लिए आश्वासन देते हैं. जैसे ही चुनाव जीत जाते हैं तो फिर उनके दर्शन तक नहीं होते हैं.

'बीमार नहीं पहुंच पाते अस्पताल'

वहीं ग्रामीण जयंती ने बताया कि हमारे गांव में रास्ते की लंबे समय से परेशानी है. इसके लिए कई बार शासन और प्रशासन के लोगों को अवगत करा चुके हैं लेकिन अभी तक कोई हल नहीं हुआ है. हमारे लिए रास्ता होना जरूरी है. रास्ता के बिना हम लोग बीमार होने पर समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते. 

'तरक्की के दौर में भी हम वहीं है'

कुंवर सैन नाम के ग्रामीण ने बताया कि 100 साल पहले यह गांव बसा था. इस समय से इस गांव के लिए कोई मुख्य रास्ता नहीं है. गर्मी के मौसम में तो जैसे तैसे निकल जाते हैं लेकिन बारिश के मौसम में हाल बेहाल हो जाते है. चलो हम लोग भील जनजाति से ताल्लुक रखते हैं और यह जनजाति पिछड़ी हुई थी. लेकिन देश की तरक्की होने के बावजूद भी हम वहीं के वहीं हैं. अगर बारिश के मौसम में कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है तो उसे चारपाई पर ले जाते है. शासन और प्रशासन के लोगों को कई बार अवगत भी कराया है लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा. 

रिश्तेदारों को 2-3 KM पहले खड़ी करनी पड़ती है गांड़ियां 

देवी सिंह नाम के ग्रामीण ने बताया की मेरा जन्म इसी गांव में हुआ है और अब मेरी उम्र 80 साल है. जन्म से लेकर अब तक मेरी आंखों के सामने रास्ते का निर्माण नहीं हो पाया. कई बार स्थानीय प्रशासन और शासन के लोगों को अवगत कराया है सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला. गर्मी के मौसम में थोड़ी सी हवा चलने पर धूल से परेशान है तो बारिश के मौसम में रास्ता अवरोध होने से जीना दुश्वार हो जाता है. रिश्तेदारों को गांव आने के लिए बाहर को करीब 2 से 3 किलोमीटर दूर खड़ा करके आना पड़ता है.

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