दीपावली पर सिख इतिहास में बंदी छोड़ दिवस प्रचलित है, जो केवल एक पर्व नहीं बल्कि मानवाधिकार, स्वतंत्रता और परोपकार का स्वर्णिम अध्याय माना जाता है. खालसा कॉलेज के इतिहास विशेषज्ञ इस पावन दिन के पूरे इतिहास के बारे में बताते हैं. साथ ही स्वर्ण मंदिर आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि यह दिन उनके लिए आस्था और मानवीय मूल्यों की सबसे बड़ी मिसाल क्यों है.