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IIT क्लियर करना है तो बनाएं रणनीति, JEE-मेन में 30% नंबर ही पर्याप्त

देव शर्मा
  • विचार,
  • Updated:
    जनवरी 12, 2026 17:26 pm IST
    • Published On जनवरी 12, 2026 17:25 pm IST
    • Last Updated On जनवरी 12, 2026 17:26 pm IST
IIT क्लियर करना है तो बनाएं रणनीति, JEE-मेन में 30% नंबर ही पर्याप्त

देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए जेईई-मेन जनवरी-सेशन की परीक्षाएं 21 जनवरी से 30 जनवरी के मध्य आयोजित की जाएंगी. भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान या आईआईटी तथा एनआईटी की प्रवेश परीक्षा अत्यंत कठिन समझी जाती है. परंतु, यह समझना आवश्यक है कि जेईई-मेन परीक्षा में सफलता प्राप्त करने हेतु रणनीति का उद्देश्यपरक होना अत्यंत आवश्यक है. जेईई-मेन क्वालिफाई करना तथा बेहतरीन एनआईटी में श्रेष्ठ ब्रांच प्राप्त करना दो भिन्न-भिन्न उद्देश्य हैं तथा इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए रणनीति भी भिन्न ही है. 

जेईई-मेन में दो तरह के परीक्षार्थी

जेईई-मेन में मुख्यतः दो-प्रकार के विद्यार्थी सम्मिलित होते हैं-

1.ऐसे विद्यार्थी जो जेईई-मेन की मेरिट सूची से बेहतरीन एनआईटी संस्थानों की श्रेष्ठ ब्रांच में प्रवेश चाहते हैं. 

2.ऐसे विद्यार्थी जिनका मूल उद्देश्य आईआईटी-संस्थानों में ही प्रवेश लेना है तथा जिनके लिए जेईई-मेन एक क्वालिफाइंग परीक्षा है.

उपरोक्त वर्णित दो-प्रकार के विद्यार्थियों को एक ही रणनीति से सफलता प्राप्त नहीं हो सकती. सफलता हेतु इन्हें अलग-अलग रणनीति अपनानी होगी.

IIT Delhi

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NIT में श्रेष्ठ ब्रांच पाने के लिए आवश्यक रणनीति

ऐसे विद्यार्थियों को फिजिक्स तथा केमिस्ट्री में फॉर्मूला तथा फैक्ट आधारित प्रश्नों पर अधिक ध्यान देना होगा. साथ ही, अत्यधिक कठिन प्रश्नों को हल करने में अपना कीमती समय नष्ट करने से बचना होगा. बेहतरीन टाइम-मैनेजमेंट के लिए इन विद्यार्थियों को यह सोचना होगा कि इनका उद्देश्य लगभग 240 अंक प्राप्त करना है, ऐसे में 65 प्रश्न भी ठीक से हल कर लिए तो यह अपने उद्देश्य में सफल हो सकते हैं.

विद्यार्थियों को जेईई-मेन,2025 जनवरी तथा अप्रैल अटेम्प्ट के सभी प्रश्नपत्रों को एग्जामिनेशन-टेंपरामेंट के साथ हल करने का अभ्यास करना होगा.  विद्यार्थियों को यह समझना होगा कि मैथेमेटिक्स विषय में स्कोर करना आसान नहीं है अतः इन्हें फिजिक्स तथा केमिस्ट्री विषय में अधिकतम स्कोर करने पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा. 

पिछले वर्षों का अनुभव बताता है कि विद्यार्थी मॉडर्न फिजिक्स में एटॉमिक स्ट्रक्चर, फोटोइलेक्ट्रिक इफेक्ट, न्यूक्लियर फिजिक्स, रेडियोएक्टिविटी तथा सेमीकंडक्टर्स एवं सेमीकंडक्टिंग डिवाइसेज पर अधिक ध्यान नहीं देते जबकि ये फिजिक्स विषय के अत्यंत स्कोरिंग टॉपिक्स हैं. फिजिक्स विषय में विद्यार्थी अल्टरनेटिंग-करंट जैसे महत्वपूर्ण टॉपिक से भी अनावश्यक दूरी बनाते हैं जबकि पिछले कुछ वर्षों में इस टॉपिक से लगातार प्रश्न पूछे जा रहे हैं.

विद्यार्थी केमिस्ट्री विषय में इनॉर्गेनिक-केमेस्ट्री को भी अधिक समय नहीं देते जबकि पिछले कुछ वर्षों में इनॉर्गेनिक-केमेस्ट्री से फैक्ट-आधारित कई प्रश्न पूछे गए हैं. विद्यार्थी यह विशेष ध्यान रखें कि वे ऑर्गेनिक-केमिस्ट्री में रिएक्शन-मेकैनिज्म के कठिन प्रश्नों में अनावश्यक तौर पर उलझे रहते हैं जबकि इसकी आवश्यकता नहीं है,ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में विद्यार्थी नेम-रिएक्शंस पर पूछें जाने वाले प्रश्नों की अच्छी प्रैक्टिस करें क्योंकि यह स्कोरिंग है. मैथमेटिक्स विषय के प्रश्न सापेक्ष तौर पर हल होने में अधिक समय लेते हैं ऐसे में यहां मानसिक दृढ़ता अधिक आवश्यक है.

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आईआईटी में प्रवेश चाहनेवाले विद्यार्थियों के लिए रणनीति

कई विद्यार्थियों का एकमात्र लक्ष्य आईआईटी-संस्थानों में प्रवेश ही होता है, ऐसे विद्यार्थियों के लिए जेईई-मेन मात्र एक क्वालिफाइंग परीक्षा है. ऐसे में इन विद्यार्थियों को जेईई-एडवांस्ड प्रवेश परीक्षा पर ही फोकस करने की आवश्यकता है. जेईई-एडवांस्ड को लक्ष्य मानकर तैयारी करने वाले विद्यार्थियों की गणित एवं फिजिक्स विषयों पर अच्छी पकड़ होती है. ऐसे में इन विद्यार्थियों को जेईई-मेन के दौरान केमिस्ट्री विषय पर थोड़ा अधिक फोकस करने की आवश्यकता है. 

इन विद्यार्थियों को इनॉर्गेनिक केमेस्ट्री में फैक्ट-आधारित प्रश्नों पर तथा ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में नेम-रिएक्शन से संबंधित प्रश्नों पर विशेष ध्यान देना चाहिए. जेईई-मेन क्वालीफाई करने के लिए लगभग 30%-अंक अर्थात 300-में से 90-अंक ही पर्याप्त है. फिर भी सभी विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी पूर्ण मनोयोग से करनी चाहिए तथा असावधानी से बचना चाहिए.

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लेखक परिचयः देव शर्मा  कोटा  स्थित इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और फ़िज़िक्स के शिक्षक हैं.  उन्होंने 90 के दशक के आरंभ में कोचिंग का चलन शुरू करने में अग्रणी भूमिका निभाई. वह शिक्षा संबंधी विषयों पर नियमित रूप से लिखते हैं.

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं.

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