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भस्त्रिका से लेकर भ्रामरी तक, मलाइका अरोड़ा ने बताया कैसे ये प्राणायाम बदल सकते हैं सेहत

बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा हमेशा अपनी फिटनेस के लिए जानी जाती है. उन्होंने पांच प्राणायाम के बारे में बताया, ज‍िसे करने के बाद आप भी फ‍िट रहेंगे. 

भस्त्रिका से लेकर भ्रामरी तक, मलाइका अरोड़ा ने बताया कैसे ये प्राणायाम बदल सकते हैं सेहत
बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा ने प्राणायाम के बारे में बताया.

बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा अक्सर सोशल मीडिया पर फैंस के साथ हेल्दी लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज और योग से जुड़ी जानकारी साझा करती रहती हैं. इस कड़ी में सोमवार को मलाइका ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह प्राणायाम करती नजर आ रही हैं.  

उन्होंने उन महत्वपूर्ण प्राणायामों का जिक्र किया जो तन और मन दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं.  उन्होंने कैप्शन में पांच प्रमुख प्राणायामों के नाम साझा किए. 

पांच प्राणायाम के बारे में बताया 

मलाइका अरोड़ा ने इंस्टाग्राम पोस्ट में जिन पांच प्रमुख प्राणायाम का जिक्र किया, उनमें भस्त्रिका प्राणायाम, कपालभाति, अनुलोम विलोम, भ्रामरी और उद्गीथ शामिल हैं.  ये सभी प्राणायाम वह वीडियो में करती नजर आ रही हैं, साथ ही इनके फायदों को भी बता रही हैं. 

भस्त्रिका प्राणायाम

भस्त्रिका प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है, शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है और मानसिक तनाव को कम करता है.  लेकिन ध्यान रहे कि हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या सांस की समस्या वाले लोग इसे बिना डॉक्टर की सलाह के न करें, क्योंकि इसमें तेज सांस लेने से सिर में चक्कर, कमजोरी या सांस फूलने की समस्या हो सकती है. 

कपालभाति

कपालभाति में सांस जोर से बाहर निकाली जाती है, जिससे शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं.  यह पाचन सुधारता है, पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और शरीर को ऊर्जा देता है.  लेकिन पेट या डायफ्राम की समस्या वाले लोग, या गर्भावस्था के दौरान, यह अभ्यास न करें; इससे पेट या छाती में तकलीफ बढ़ सकती है. 

अनुलोम विलोम

अनुलोम विलोम में नाक से धीरे-धीरे सांस ली और छोड़ी जाती है.  यह प्राणायाम मानसिक शांति, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और नींद सुधारने में मदद करता है.  लेकिन अगर किसी को सांस की समस्या, ब्लड प्रेशर या हृदय रोग है, तो बिना प्रशिक्षक की मदद के अनुलोम विलोम करना सही नहीं है.  गलत तरीके से अभ्यास करने पर चक्कर, सांस फूलना या थकान हो सकती है. 

भ्रामरी

भ्रामरी में सांस छोड़ते समय भौंरे के गुंजन जैसी आवाज निकलती है.  यह दिमाग को शांत करता है, सिरदर्द और मानसिक तनाव कम करता है.  इसके फायदे अनेक हैं, लेकिन कान में समस्या, अत्यधिक शोर या सिर सिरदर्द होने पर इसे करने से नुकसान हो सकता है.  तेज आवाज के साथ करना या बहुत ज्यादा देर तक करना सिरदर्द बढ़ा सकता है. 

उद्गीथ

उद्गीथ में गहरी सांस लेकर धीरे-धीरे आवाज के साथ छोड़ी जाती है.  यह फेफड़ों को मजबूत करता है और मानसिक तनाव कम करता है.  हालांकि, अगर किसी को सांस लेने में तकलीफ है या गले में समस्या है, तो उद्गीथ प्राणायाम करने से गले में जलन, खांसी, या सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है. 

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