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10वीं में 75 तो 12वीं में 85% अंक, मेडिकल की तैयारी छोड़ जैन साध्वी बनने जा रही राजस्थान की बेटी

Kanishka Jain: 10वीं और 12 वीं में 75 फीसदी से ज्यादा अंक लाकर नीट की तैयारी कर रही राजस्थान की एक बेटी अब जैन साध्वी बनने जा रही है. पढ़िए कनिष्का जैन की कहानी.

10वीं में 75 तो 12वीं में 85% अंक, मेडिकल की तैयारी छोड़ जैन साध्वी बनने जा रही राजस्थान की बेटी
जैन साध्वी बनने जा रही कनिष्का जैन.

Kanishka Jain: राजस्थान की एक 21 साल की बेटी जैन साध्वी बनने जा रही है. पढ़ाई में बेहद होनहार इस बेटी ने 10वीं में 75 प्रतिशत और 12वीं में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. 12वीं के बाद डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए NEET की तैयारी कर रही थी. लेकिन अब इस बेटी ने सांसारिक जीवन त्याग कर जैन साध्वी बनने का निर्णय लिया है. जैन साध्वी बनने का निर्णय लेने वाली राजस्थान की यह बेटी भरतपुर के कुम्हेर की रहने वाली है. हालांकि वर्तमान में अलवर के बड़ौदा मेव में रह रही है. इस बेटी का नाम कनिष्का जैन है. 

कनिष्का अपने परिवार की इकलौती बेटी है. जो 11 दिसंबर को जोधपुर में आचार्य भगवंत 1008 हीराचंद जी महाराज के सानिध्य में दीक्षा ग्रहण करेंगी.

पिता बोले- बेटी के कठोर निर्णय पर गर्व

कनिष्का ने अपनी 10वीं में 75% और 12वीं में साइंस स्ट्रीम से 85% अंक प्राप्त किए. उनके पिता पवन जैन ने बताया कि कनिष्का पढ़ाई में हमेशा अव्वल रही हैं. हालांकि, बेटी के इस कठोर निर्णय पर उन्हें गर्व है. दीक्षा लेने की प्रेरणा कनिष्का को अपनी माँ से मिली, जो स्वयं भी इस राह पर चलना चाहती थीं, लेकिन परिवारिक परिस्थितियों के कारण वे ऐसा नहीं कर पाईं.

कनिष्का ने बताया कि एक व्याख्यान से उन्हें गहरा वैराग्य मिला, जिसके बाद उन्होंने मोक्ष मार्ग पर चलने का निर्णय लिया.

धार्मिक समुदाय का सहयोग, करौली में निकाली बरघोड़ा यात्रा

सकल जैन समाज कनिष्का के इस निर्णय को लेकर बेहद गर्वित है. उनकी बरघोड़ा यात्रा करौली में धूमधाम से निकाली गई. यह यात्रा ननिहाल पक्ष के द्वारा बैंड-बाजों की धुन पर निकली. कनिष्का ने युवाओं को धर्म के मार्ग पर चलने और अपने बुजुर्गों की सेवा करने का संदेश दिया. 

करौली में निकाली गई यात्रा.

करौली में निकाली गई यात्रा.

मेरा जीवन अब मोक्ष मार्ग की साधनाः कनिष्का

कनिष्का का कहना है कि उनका जीवन अब मोक्ष मार्ग की साधना और सांसारिक दुखों से मुक्ति पाने के लिए समर्पित है. कनिष्का की माँ मधु जैन ने इस निर्णय को कठिन लेकिन गर्व का विषय बताया. उन्होंने कहा कि दीक्षा दिलाना एक माँ के लिए कठिन है, लेकिन यह संसार की सबसे पवित्र और उत्तम राह है.

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