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Kota Chambal River Front: राजस्थान की कोचिंग सिटी कोटा में गहलोत सरकार ने करीब 1400 करोड़ की लागत से चंबल रिवर फ्रंट का निर्माण कराया है. लेकिन इस निर्माण कार्य में नियमों की अनदेखी सहित मानकों का ध्यान नहीं रखने का गंभीर आरोप लगा है. मामले की जांच के लिए पहुंची टीम का दो दिवसीय दौरा शुक्रवार को समाप्त हो गया.
एनजीटी द्वारा गठित ज्वाइंट कमेटी ने चंबल रिवर फ्रंट का दो दिवसीय निरीक्षण कंप्लीट कर लिया है. कमेटी रिवर फ्रंट की विजिट कर तथ्यात्मक रिपोर्ट और कुछ डाटा लेकर कोटा से रवाना हो गई. ज्वाइंट कमेटी चार सदस्यीय थी जो अब 6 सप्ताह में एनजीटी को पूरी डिटेल रिपोर्ट सबमिट करेगी.
कमेटी ने रिवर फ्रंट और किशोर सागर तालाब पहुंचकर मौका मुआयना किया था. कोटा यूआईटी, फॉरेस्ट विभाग, इरिगेशन विभाग और जिला कलेक्ट्रेट से रिकॉर्ड लिया. जिसका कमेटी सत्यापित करेगी. एनजीटी में दायर याचिका में लगाए गए आरोपों की जांच की रिपोर्ट एनजीटी कोर्ट में पेश की जाएगी.
एनजीटी की ओर गठित कमेटी बुधवार को कोटा पहुंची थी. कलेक्टर से मुलाकात के बाद टीम कुन्हाड़ी स्तिथ रिवर फ्रंट के शोर्य घाट पर निरीक्षण करने पहुंची. पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के रीजनल ऑफिसर, जैव विविधता बोर्ड के मेंबर, कोटा एडीएम सिटी और जलसंसाधन विभाग के एसई को शामिल किया.
मालूम हो कि कोटा में चंबल नदी पर 1400 करोड़ से ज्यादा की लागत से चम्बल रिवर फ्रंट का निर्माण हुआ है. इसके निर्माण को लेकर नियमों के उल्लंघन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए है. अजमेर निवासी अशोक मलिक और द्रुपद मलिक ने एक याचिका एनजीटी में दायर करते हुए आरोप लगाया था कि रिवर फ्रंट का कंस्ट्रक्शन घड़ियाल अभयारण्य इलाके में हुआ है.
नदी के किनारों पर कॉमर्शियल एक्टिविटी की जा रही है जो पूरी तरह अवैध है. इसके लिए कोटा यूआईटी ने कोई परमिशन भी नहीं ली. न ही पर्यावरण स्वीकृति हासिल की गई है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि ये पूरी तरह वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट का उल्लंघन है.
वहीं इस मामले को लेकर भाजपा के पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने भी आरोप लगाया था कि रिवर फ्रंट पर किया गया निर्माण विधि के विरुद्ध है. अब एनजीटी क्या फैसला ज्वाइंट कमेटी के द्वारा दी गई रिपोर्ट के बाद लेगी, बस इंतजार इसी का है.
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