
नाथद्वारा के पुष्टिमार्ग की प्रधान पीठ श्रीनाथजी मंदिर में कल रात अन्नकूट उत्सव का आयोजन किया गया. इस मौके पर हजारों की संख्या में देश भर से आए श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. दर्शन के बाद नियत समय पर अन्नकूट के सकडी प्रसाद को आदिवासी समाज के लोगों ने लूटा. यह परम्परा कई सालों से जारी है.
परंपरा है कि इस महाप्रसाद को आदिवासी समाज में वर्ष भर सहेज कर रखा जाता है. जिससे परिवार में धन की कमी नहीं होती. गुजरात,महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश राज्य से लोग इस परम्परा में शामिल होने आते हैं वहीं नाथद्वारा और उसके आस पास के ज़िलों से भी लोग बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं. इसी वजह से इन दिनों सभी होटल धर्मशालाएं और बसें खचाखच भरी हैं. भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने भी पर्याप्त पुलिस जाब्ता तैनात किया है.
सैकड़ों सालों से है परम्परा
प्रदेश के राजसमंद जिले के नाथद्वारा में वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी मंदिर में अन्नकूट लूट की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. यहां ख़ास तौर से आदिवासी भील प्रसाद लूटने आते हैं. यह आयोजन दीपावली के दूसरे दिन होता है. जहां अन्नकूट का भोग लगता है. यह अन्नकूट साठ प्रकार के व्यंजनों से तैयार किया जाता है. जिसे भगवान श्रीनाथजी को चढ़ाया जाता है.
गर्म प्रसाद को भी हाथों में ले लेते हैं भक्त
प्रसाद लूटने की परम्परा काफी भक्तिभोर होती है. करीब 20 किवंटल चावलों को पका कर एक ढेर लगा दिया जाता है. काफी गर्म होने के बावजूद आदिवासी भक्त भक्ति भाव से इसमें टूट पड़ते हैं और इसकी महत्ता इतनी है कि इसे अपने घर ले जा कर तिजोरी में रखते हैं. अन्नकूट प्रसाद को बेहद पवित्र माना जाता है
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